Zindagi Yeh Nahi Hai Kisi Ke Liye Naat Lyrics & Tashreeh
Ahl-e-Sunnat ke roshan sitaron ke ishq-o-aqeedat par mabni ye kalam “Zindagi Yeh Nahi Hai Kisi Ke Liye Lyrics” sachaai aur ishq-e-rasool ﷺ ka ek behtareen aiena hai. Is kalam ka shair ummat ko ye batata hai ki insaan ki paidaish ka asal maqsad sirf aur sirf Aaqa kareem ﷺ ki gulami aur unki mohabbat hai. Jo dil ishq-e-mustafa se khali hain, unki zindagi bezar hai.
Neeche is pakiza kalam ke mukammal lyrics teenon zabaanon (Roman Urdu, Hindi, aur Urdu) mein diye gaye hain, aur sath hi har ek sher ki mukammal Unique Hindi Tashreeh shamil hai.
📄 1. Zindagi Yeh Nahi Hai Kisi Ke Liy Lyrics In Roman Urdu
Zindagi yeh nahi hai kisi ke liye Zindagi hai nabi ki nabi ke liye
Na samajh marte hain zindagi ke liye Chandni char din hai sabhi ke liye
Jeena marna hai sab kuch nabi ke liye Hai sada chand Abdul Nabi ke liye
“Anta feehim” ke daaman mein munkir bhi hain Hum rahe ishrat-e-daimi ke liye
Aish kar lo yahan munkiro char din Mar ke tarso ge is zindagi ke liye
Daagh-e-ishq-e-nabi le chalo qabr mein Hai chiragh-e-lahad roshni ke liye
Naqsh-e-paaye sagan-e-nabi dekhiye Yeh pata hai bahut rahbari ke liye
Maslak-e-Alahazrat salamat rahe Ek pehchan deen-e-nabi ke liye
Maslak-e-Alahazrat pe qaim raho Zindagi di gayi hai isi ke liye
Sulh-e-kulli nabi ka nahi sunniyo! Sunni muslim hai sacha nabi ke liye
Woh bulate hain koi yeh aawaz de Dam mein ja pahonchoon main haziri ke liye
Ae naseem-e-saba un se keh de shaha Muztarib hai gada haziri ke liye
Jin ke dil mein hai ishq-e-nabi ki chamak Woh taraste nahi chandni ke liye
Jin ke dil mein hain jalwe tire ishq ke Chashma-e-noor hain roshni ke liye
Jin ke dil mein hain jalwe tire ishq ke Woh hain najm-e-zaman roshni ke liye
Noori Akhtar Qadri khuld mein chal diya Khuld wa hai har ik Qadri ke liye
📄 3. Zindagi Yeh Nahi Hai Kisi Ke Liye Lyrics in Urdu
حضور مفتیِ اعظم ہند مولانا مصطفیٰ رضا خان نوری اور تاج الشریعہ علامہ اختر رضا خان ازہری کے افکار و ارادت پر مبنی یہ کلامِ محبت تصوف اور عشقِ رسول ﷺ کا ایک حسین امتزاج ہے۔
زندگی یہ نہیں ہے کسی کے لئے زندگی ہے نبی کی نبی کے لئے
نا سمجھ مرتے ہیں زندگی کے لئے چاندنی چار دن ہے سبھی کے لئے
جینا مرنا ہے سب کچھ نبی کے لئے ہے سدا چاند عبدالنبی کے لئے
” انت فیہم “ کے دامن میں منکر بھی ہیں ہم رہے عشرت دائمی کے لئے
عیش کر لو یہاں منکرو چار دن مر کے ترسو گے اس زندگی کے لئے
داغ عشق نبی لے چلو قبر میں ہے چراغ لحد روشنی کے لئے
نقش پائے سگان نبی دیکھئے یہ پتہ ہے بہت رہبری کے لئے
مسلک اعلیٰ حضرت سلامت رہے ایک پہچان دین نبی کے لئے
مسلک اعلیٰ حضرت پہ قائم رہو زندگی دی گئی ہے اس کے لئے
صلح کلی نبی کا نہیں سنیو! سنی مسلم ہے سچا نبی کے لئے
وہ بلاتے ہیں کوئی یہ آواز دے دم میں جا پہنچوں میں حاضری کے لئے
اے نسیم صبا ان سے کہہ دے شہا مضطرب ہے گدا حاضری کے لئے
جن کے دل میں ہے عشق نبی کی چمک وہ ترستے نہیں چاندنی کے لئے
جن کے دل میں ہیں جلوے ترے عشق کے چشمہ نور ہیں روشنی کے لئے
جن کے دل میں ہیں جلوے ترے عشق کے وہ ہیں نجم زماں روشنی کے لئے
نوری اختر قادری خلد میں چل دیا خلد وا ہے ہر اک قادری کے لئے
📚 4. Complete Naat Ki Tashrih In Hindi (मुकम्मल व्याख्या)
ज़िन्दगी यह नहीं है किसी के लिए / ज़िन्दगी है नबी की नबी के लिए
तशरीह: इस दुनिया की आम सांसारिक भाग-दौड़ का नाम असल ज़िंदगी नहीं है। हक़ीक़त में यह जीवन और इसकी तमाम रातें-सुबहें सिर्फ़ और सिर्फ़ हमारे आक़ा मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की इबादत, उनकी ग़ुलामी और उनके दीन को फैलाने के लिए ही समर्पित होनी चाहिए।
ना समझ मरते हैं जिंदगी के लिए / चाँदनी चार दिन है सभी के लिए
तशरीह: जो लोग इस नश्वर संसार की चंद रोज़ा ऐश-ओ-आराम की ज़िंदगी को ही सब कुछ मान बैठते हैं, वे नासमझ हैं। दुनिया की यह चकाचौंध तो महज़ चार दिन की चाँदनी की तरह है जो पल भर में ख़त्म हो जाएगी, इसलिए स्थाई जीवन (आख़िरत) की फ़िक्र करनी चाहिए।
जीना मरना है सब कुछ नबी के लिये / है सदा चाँद अब्दुल नबी के लिए
तशरीह: एक सच्चे मोमिन का जीना और मरना सिर्फ़ हुज़ूर ﷺ की रज़ा के लिए होता है। जो बंदा अपने आप को ‘अब्दुल नबी’ (नबी का ग़ुलाम) बना लेता है, उसके भाग्य का चाँद हमेशा चमकता रहता है और उसे दोनों जहान में रुतबा मिलता है।
“अन्त फ़ीहिम” के दामन में मुन्किर भी हैं / हम रहे عشرت (इशरत) دائمی (दायमी) के लिए
तशरीह: क़ुरआन की आयत (कि आप उनके बीच हैं) के सदक़े में दुनिया में अल्लाह का अज़ाब रुका हुआ है, जिसका फ़ायदा मुन्किर (नाफ़रमान) भी उठा रहे हैं। मगर हम हुज़ूर ﷺ के वफ़ादार हैं, इसलिए हम आख़िरत में हमेशा रहने वाले सुख (इशरत-ए-दायमी) के हक़दार बनेंगे।
ऐश कर लो यहाँ मुन्किरो चार दिन / मर के तरसो गे इस ज़िंदगी के लिए
तशरीह: दीन के दुश्मनों और नाफ़रमानों को चेतावनी देते हुए शफ़ीक़ लहज़े में कहा गया है कि तुम दुनिया की इस चार दिन की झूठी मोह-माया में चाहे जितना ऐश कर लो, जब मौत आएगी तो तुम दोबारा इस कीमती वक़्त और ज़िंदगी को पाने के लिए तरसोगे ताकि तौबा कर सको, पर तब वक़्त हाथ से निकल चुका होगा।
दाग़–ए–इश्क़–ए–नबी ले चलो क़ब्र में / है चिराग़–ए–لحد (लहद) रोशनी के लिए
तशरीह: अगर तुम चाहते हो कि अंधी और तंग क़ब्र में उजाला हो, तो अपने सीने में हुज़ूर ﷺ की मोहब्बत का दाग़ (निशान) सजा कर जाओ। आक़ा ﷺ के इश्क़ की यही तड़प और नूर तुम्हारी लहद (क़ब्र) में चिराग़ बनकर चमकेगा।
नक़्श–ए–पाए सगान–ए–नबी देखिये / यह पता है बहुत रहबरी के लिए
तशरीह: अगर तुम्हें सीधे रास्ते (सिराते मुस्तक़ीम) की तलाश है, तो हुज़ूर ﷺ के वफ़ादार ग़ुलामों और उनके शहर के शिफ़ा-याफ़्ता परवानों के पद-चिह्नों (नक़्श-ए-पा) को अपना मार्गदर्शक बना लो। भटके हुए मुसाफ़िरों का मार्गदर्शन करने के लिए यह पता काफ़ी है।
मस्लक–ए–आला हज़रत सलामत रहे / एक पहचान दीन–ए–नबी के लिए
तशरीह: आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी का रास्ता कोई नया दीन नहीं है, बल्कि यह हुज़ूर ﷺ के सच्चे और बेदाग़ दीन (अहले सुन्नत वल जमात) की शुद्ध पहचान है। अल्लाह इस हक़ के रास्ते को हमेशा सलामत रखे।
मस्लक–ए–आला हज़रत पे क़ाइम रहो / ज़िन्दगी दी गयी है इसी के लिए
तशरीह: उम्मत को नेक मशवरा देते हुए कहा गया है कि हमेशा आला हज़रत के बताए हुए सनातनी अक़ीदे पर टिके रहो। हमें यह इंसानी जीवन इसीलिए मिला है ताकि हम बिना किसी मिलावट के अपने आक़ा ﷺ की सच्ची वफ़ादारी में पूरी ज़िंदगी गुज़ार दें।
सुल्ह–कुल्ली नबी का नहीं सुन्नियो! / सुन्नी मुस्लिम है सच्चा नबी के लिए
तशरीह: ऐ सुन्नियों! याद रखो, जो लोग हर ग़लत और सही अक़ीदे को एक समान मानते हैं (सुल्ह-कुल्ली), वे हुज़ूर ﷺ के सच्चे वफ़ादार नहीं हो सकते। एक सच्चा सुन्नी मुसलमान वही है जो अपने नबी ﷺ की शान में ज़रा सी भी गुस्ताख़ी बर्दाश्त न करे और सिर्फ़ हुज़ूर ﷺ के लिए जिए।
वह बुलाते हैं कोई यह आवाज़ दे / दम में जा पहुँचूँ मैं हाज़िरी के लिए
तशरीह: मदीने वाले आक़ा ﷺ तो हर सच्चे आशिक़ को अपने दर पर बुलाते हैं, बस दिल में तड़प और बुलावे की आवाज़ सुनने की सलाहियत होनी चाहिए। मेरी तो यही आरज़ू है कि जैसे ही बुलावा आए, मैं पलक झपकते (एक दम में) मदीना शरीफ़ की हाज़िरी के लिए पहुँच जाऊँ।
ऐ नसीम–ए–सबा उनसे कह दे शहा / मुज़्तरिब है गदा हाज़िरी के लिए
तशरीह: मदीने की तरफ़ चलने वाली ठंडी हवा (नसीम-ए-सबा) से फ़रियाद करते हुए आशिक़ कहता है कि ऐ सबा! मेरा यह पैग़ाम शहंशाह-ए-मदीना ﷺ की बारगाह में पहुँचा दे कि आपका यह अदना मँगता (गदा) आपके रौज़े की हाज़िरी के लिए बेहद बेचैन और व्याकुल (मुज़्तरिब) है।
जिनके दिल में है इश्क़–ए–नबी की चमक / वह तरसते नहीं चाँदनी के लिए
तशरीह: जिन ख़ुशक़िस्मत लोगों के सीने में हुज़ूर रहमत-ए-आलम ﷺ की मोहब्बत का नूर जगमगा रहा है, उन्हें दुनिया के अस्थाई मान-सम्मान या आसमान की भौतिक चाँदनी की कोई चाहत नहीं होती, उनका दिल ख़ुद अंदर से रौशन होता है।
जिनके दिल में हैं जल्वे तिरे इश्क़ के / चश्मा–ए–नूर हैं रोशनी के लिए
तशरीह: ऐ मेरे आक़ा ﷺ! जिन आशिकों के पाक दिलों में आपकी सच्ची मोहब्बत के जलवे बस चुके हैं, वे दूसरों के लिए भी नूर का स्रोत (चश्मा-ए-नूर) बन जाते हैं और उनकी संगति से ज़माना रौशन हो जाता है।
जिनके दिल में हैं जल्वे तिरे इश्क़ के / वह हैं नज्म–ए–ज़माँ रोशनी के लिए
तशरीह: वही लोग ज़माने के सच्चे सितारे (नज्म-ए-ज़माँ) हैं जिनके दिलों में इश्क़-ए-रसूल ﷺ का उजाला है। वे भटके हुए इंसानों को सीधा रास्ता दिखाकर समाज में फैली अज्ञानता के अंधेरे को दूर करते हैं।
नूरी अख़्तर क़ादरी ख़ुल्द में चल दिया / ख़ुल्द वा है हर इक क़ादरी के लिए
तशरीह: कलाम के आख़िरी बंद (मक्ते) में नूरी (मुफ़्ती-ए-आज़म हिंद) और अख़्तर (ताजुल शरिया) के सिलसिलों का ज़िक्र करते हुए दृढ़ विश्वास जताया गया है कि जो भी बंदा सच्चे दिल से इस का़दरी सिलसिले से जुड़ गया, वह दुनिया से ईमान के साथ जन्नत (ख़ुल्द) की तरफ़ कूच कर गया, क्योंकि ऐसे वफ़ादारों के लिए जन्नत के दरवाज़े हमेशा खुले (वा) रहते हैं।



