Zaban Par Liye Rab Habli Ka Naghma Lyrics & Tashreeh
Aamad-e-Mustafa ﷺ ke mauzoo par likha gaya ye mahshoor kalam “Zaban Par Liye Rab Habli Ka Naghma Nabi Aa Rahe Hain” har saal Jashn-e-Eid Miladunnabi ke mauqay par baray zauk-o-shauq se parha jata hai. Is kalam mein shair ne Aaqa Kareem ﷺ ki aamad, unki shafaat, aur baargah-e-ilahi mein unke buland maqam ka zikr behad haseen andaz mein kiya hai.
Neeche is pakiza kalam ke mukammal lyrics teenon zabaanon (Roman Urdu, Hindi, aur Urdu) mein diye gaye hain, sath hi har ek sher ki mukammal Hindi Tashreeh bhi shamil hai.
📄 1. Zaban Par Liye Rab Habli Ka Naghma Lyrics In Roman Urdu
Zaban par liye Rab-bi Hab-li ka naghma Nabi aa rahe hain, Nabi aa rahe hain Woh maathe pe bandhe shafaat ka sehra Nabi aa rahe hain, Nabi aa rahe hain
Habeeb-e-Khuda Khatam-ul-Anbiya hain Woh Shams-ud-Duha hain, woh Badr-ud-Duja hain Liye dast-e-rahmat mein jannat ka tohfa Nabi aa rahe hain, Nabi aa rahe hain
Kaba jo Allah ka paak ghar tha Woh ghar kafiron ka bana but-kada tha Banane ise ahl-e-imaan ka qibla Nabi aa rahe hain, Nabi aa rahe hain
Zameen aasmaan kuch bhi paida na hota Khuda ki khudai ka charcha na hota Padhane sabhi ko risalat ka kalma Nabi aa rahe hain, Nabi aa rahe hain
Yateemon ko jis ne gale se lagaya Gareebon ki gurbat mein jo kaam aaya Woh majboor be-kas ka ban kar sahara Nabi aa rahe hain, Nabi aa rahe hain
Munawwar hua Aamina bi ka aangan Bani yeh zameen mere aaqa ka maskan Farishton ne kabe pe lahraya jhanda Nabi aa rahe hain, Nabi aa rahe hain
Jinhein noor se apne Rab ne banaya Jinhein khud Khuda ne likhaya padhaya Woh ummi laqab ban ke jannat ka dulha Nabi aa rahe hain, Nabi aa rahe hain
Na ghabrao ae gamzado be-saharo Manao khushi ae museebat ke maaro Woh dekho lutane Khuda ka khazana Nabi aa rahe hain, Nabi aa rahe hain
Kroron durood-o-salaam-e-mohabbat Padho shah-e-kaunain par khoob farhat Woh mukhtar-e-kul ban ke jaan-e-maseeha Nabi aa rahe hain, Nabi aa rahe hain
📄 2. Zaban Par Liye Rab Habli Ka Naghma Lyrics In Hindi
ज़बाँ पर लिये रब-बि हब-ली का नग़्मा नबी आ रहे हैं, नबी आ रहे हैं
वह माथे पे बाँधे शफ़ाअत का सेहरा नबी आ रहे हैं, नबी आ रहे हैं
हबीब-ए-ख़ुदा ख़ातम-उल-अम्बिया हैं वह शम्स-उद-दुहा हैं, वह बदरुद-दुजा हैं
लिये दस्त-ए-रहमत में जन्नत का तोहफ़ा नबी आ रहे हैं, नबी आ रहे हैं
काबा जो अल्लाह का पाक घर था वह घर काफ़िरों का बना बुत-कदा था
बनाने इसे अहले-ईमान का क़िबला नबी आ रहे हैं, नबी आ रहे हैं
ज़मीं आसमाँ कुछ भी पैदा न होता ख़ुदा की ख़ुदाई का चर्चा न होता
पढ़ाने सभी को रिसालत का कलमा नबी आ रहे हैं, नबी आ रहे हैं
यतीमों को जिसने गले से लगाया ग़रीबों की ग़ुरबत में जो काम आया
वह मजबूर बेकस का बन कर सहारा नबी आ रहे हैं, नबी आ रहे हैं
मुनव्वर हुआ आमिना बी का आँगन बनी यह ज़मीं मेरे आक़ा का मस्कन
फ़रिश्तों ने काबे पे लहराया झंडा नबी आ रहे हैं, नबी आ रहे हैं
जिन्हें नूर से अपने रब ने बनाया जिन्हें ख़ुद ख़ुदा ने लिखाया पढ़ाया
वह उम्मी लक़ब बन के जन्नत का दूल्हा नबी आ रहे हैं, नबी आ रहे हैं
न घबराओ ऐ ग़मज़दो बे-सहारो मनाओ ख़ुशी ऐ मुसीबत के मारो
वह देखो लुटाने ख़ुदा का ख़ज़ाना नबी आ रहे हैं, नबी आ रहे हैं
करोड़ों दुरूद-ओ-सलाम-ए-मोहब्बत पढ़ो शाह-ए-कौसैन पर ख़ूब फ़रहत
वह मुख़्तार-ए-कुल बन के जान-ए-मसीहा नबी आ रहे हैं, नबी आ रहे हैं
📚 4. Complete Naat Ki Tashrih In Hindi (मुकम्मल व्याख्या)
1. ज़बाँ पर लिये रब-बि हब-ली का नग़्मा / नबी आ रहे हैं, नबी आ रहे हैं…
- तशरीह: जब हमारे प्यारे आक़ा मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ इस दुनिया में तशरीफ़ लाए, तो आपकी मुबारक ज़बान पर अपनी उम्मत की माफ़ी के लिए ‘रब्बी हबली उम्मती’ (ऐ मेरे रब! मेरी उम्मत मुझे अता कर) की दुआ थी। वे अपनी उम्मत की शफ़ाअत और बख़्शिश की ज़िम्मेदारी का ताज़ सजाकर इस दुनिया में तशरीफ़ ला रहे हैं।
2. हबीब-ए-ख़ुदा ख़ातम-उल-अम्बिया हैं / वह शम्स-उद-दुहा हैं, वह बदरुद-दुजा हैं…
- तशरीह: हमारे नबी अल्लाह तआला के सबसे प्यारे महबूब और आख़िरी पैगंबर (ख़ातम-उल-अम्बिया) हैं। वे ही हक़ीक़त में चौधवीं के चाँद की तरह अंधेरी दुनिया को रौशन करने वाले (बदरुद-दुजा) और दिन की चमकती धूप की तरह नूर बरसाने वाले हैं। वे अपने रहमत भरे हाथों में उम्मतियों के लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी और तोहफ़ा लेकर आ रहे हैं।
3. काबा जो अल्लाह का पाक घर था / वह घर काफ़िरों का बना बुत-कदा था…
- तशरीह: पवित्र काबा जो अल्लाह तआला की मख़सूस इबादत का स्थान था, हुज़ूर ﷺ के आने से पहले मूर्तियों का स्थान (बुत-कदा) बन चुका था। काबा शरीफ़ को दोबारा एक ख़ुदा के इबादतगुज़ारों और ईमान वालों का क़िबला बनाने के लिए नबी-ए-करीम ﷺ तशरीफ़ ला रहे हैं।
4. ज़मीं आसमाँ कुछ भी पैदा न होता / ख़ुदा की ख़ुदाई का चर्चा न होता…
- तशरीह: अगर अल्लाह तआला को अपने महबूब ﷺ को पैदा न करना होता, तो न यह ज़मीन बनती, न आसमान बनता और न ही इस दुनिया में अल्लाह तआला की अज़मत का चर्चा होता। पूरी दुनिया को ईमान और रिसालत का कलिमा सिखाने के लिए ही आक़ा ﷺ की आमद हुई है।
5. यतीमों को जिसने गले से लगाया / ग़रीबों की ग़ुरबत में जो काम आया…
- तशरीह: इस नज़्म में हुज़ूर ﷺ के अख़लाक़-ए-हसना का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि वे यतीमों के सिर पर हाथ रखने वाले, ग़रीबों की मुफ़लिसी में उनका सहारा बनने वाले और हर बेबस और लाचार इंसान के सच्चे मददगार बनकर दुनिया में तशरीफ़ लाए हैं।
6. मुनव्वर हुआ आमिना बी का आँगन / बनी यह ज़मीं मेरे आक़ा का मस्कन…
- तशरीह: हुज़ूर ﷺ के मुबारक जन्म से आपकी वालिदा बीबी आमिना का आँगन नूर से भर गया। इस पूरी ज़मीन को आक़ा ﷺ का निवास-स्थान (मस्कन) बनने का गौरव मिला और आपकी आमद की ख़ुशी में फ़रिश्तों ने काबा शरीफ़ पर नूर का झंडा फहराया।
7. जिन्हें नूर से अपने रब ने बनाया / जिन्हें ख़ुद ख़ुदा ने लिखाया पढ़ाया…
- तशरीह: हमारे नबी को अल्लाह तआला ने अपने विशेष नूर से बनाया और उन्हें किसी दुनियावी उस्ताद के पास पढ़ने की ज़रूरत नहीं पड़ी, क्योंकि ख़ुद अल्लाह तआला ने उन्हें तमाम उलूम सिखाए। वे ‘उम्मी’ (बिना दुनियावी उस्ताद के ज्ञान रखने वाले) का लक़ब पाकर पूरी कायनात और जन्नत के दूल्हा बनकर आए हैं।
8. न घबराओ ऐ ग़मज़दो बे-सहारो / मनाओ ख़ुशी ऐ मुसीबत के मारो…
- तशरीह: ऐ दुनिया के ग़मज़दा, लाचार और दुखी लोगो! अब घबराने और निराश होने की ज़रूरत नहीं है। ज़रा आँखें खोलकर देखो, दोनों जहान के मालिक के ख़ज़ाने और रहमतें दिल खोलकर लुटाने वाले हमारे प्यारे आक़ा ﷺ तशरीफ़ ला रहे हैं, इसलिए दिल खोलकर ख़ुशी मनाओ।
9. करोड़ों दुरूद-ओ-सलाम-ए-मोहब्बत / पढ़ो शाह-ए-कौसैन पर ख़ूब फ़रहत…
- तशरीह: दोनों जहान के मालिक व मुख़्तार, जो बेकसों के मसीहा हैं, उनके आने की ख़ुशी में अपने दिलों को तरोताज़ा करते हुए उन पर दिल से करोड़ों बार दुरूद-ओ-सलाम का नज़राना पेश करो।



