Sab Se Aula Wa Aala Hamara Nabi Lyrics with (Explanation of Verses)
अस्सलामू अलैकुम दोस्तों,
आज के इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपके लिए लेकर आए हैं आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान रज़ियल्लाहु अन्हु का एक बेहद ही मशहूर और रूहानी कलाम (नात-ए-पाक) जिसका उनवान है “सब से औला व आला हमारा नबी”। यह नात अक़ीदत-मंदों के दिलों को मुनव्वर करने वाली और हुज़ूर पाक ﷺ की अज़मत को बयान करने वाली एक लाज़वाब पेशकश है।
नीचे इस नात शरीफ़ के तमाम अशआर को उर्दू, हिंदी और रोमन हिंदी (Transliteration) में पेश किया गया है ताकि आप इसे आसानी से पढ़ और समझ सकें।
1. Sab Se Aula Wa Aala Hamara Nabi Lyrics in Roman Hindi (रोमन हिंदी)
Sab Se Aula Wa Aala Hamara Nabi
Sab se aula wa aala hamara Nabi
Sab se bala wa wala hamara Nabi
Apne maula ka pyara hamara Nabi
Donon aalam ka dulha hamara Nabi
Bazm-e-aakhir ka shamma-e-furozan hua
Noor-e-awwal ka jalwa hamara Nabi
Jis ko shayan hai arsh-e-khuda par juloos
Hai wo sultan-e-wala hamara Nabi
Bujh gayeen jis ke aage sabhi mash-alein
Shamma wo le kar aaya hamara Nabi
Jis ke talwon ka dhowan hai aab-e-hayat
Hai wo jaan-e-masiha hamara Nabi
Arsh-o-kursi ki theen aaina-bandiyan
Soo-e-haq jab sidhara hamara Nabi
Khalq se auliya, auliya se rusul
Aur rasoolon se aala hamara Nabi
Husn khata hai jis ke namak ki qasam
Wo maleeh-e-dil-aara hamara Nabi
Zikr sab pheeke jab tak na mazkoor ho
Namkeen husn wala hamara Nabi
Jis ki do boond hain kausar-o-salsabeel
Hai wo rahmat ka darya hamara Nabi
Jaise sab ka khuda ek hai waise hi
Un ka, un ka, tumhara, hamara Nabi
Qarnon badli rasoolon ki hoti rahi
Chand badli ka nikla hamara Nabi
Kaun deta hai dene ko munh chahiye
Dene wala hai sachha hamara Nabi
Kya khabar kitne taare khile chhup gaye
Par na doobe na dooba hamara Nabi
Mulk-e-kounain mein ambiya tajdar
Tajdaron ka aaqa hamara Nabi
La-makan tak ujala hai jis ka wo hai
Har makan ka ujala hamara Nabi
Saare achhon mein achha samajhiye jise
Hai us achhe se achha hamara Nabi
Saare oonchon mein ooncha samajhiye jise
Hai us oonche se ooncha hamara Nabi
Ambiya se karoon arz kyun maliko!
Kya nabi hai tumhara, hamara Nabi
Jis ne tukde kiye hain qamar ke wo hai
Noor-e-wahdat ka tukda hamara Nabi
Sab chamak wale ujlon mein chamka kiye
Andhe sheeshou mein chamka hamara Nabi
Jis ne murda dilon ko di umr-e-abad
Hai wo jaan-e-masiha hamara Nabi
Gham-zadon ko Raza muzda deeje ke hai
Bekason ka sahara hamara Nabi
2. Sab Se Aula Wa Aala Hamara Nabi Lyrics in Hindi (हिंदी)
सब से औला व आला हमारा नबी
सब से औला व आला हमारा नबी
सब से बाला व वाला हमारा नबी
अपने मौला का प्यारा हमारा नबी
दोनों आलम का दूल्हा हमारा नबी
बज़्म-ए-आख़िर का शम्म-ए-फ़रोज़ां हुआ
नूर-ए-अव्वल का जल्वा हमारा नबी
जिस को शायां है अर्श-ए-ख़ुदा पर जलूस
है वो सुल्तान-ए-वाला हमारा नबी
बुझ गयीं जिस के आगे सभी मश्अलें
शम्म वो ले कर आया हमारा नबी
जिस के तलवों का धोवन है आब-ए-हयात
है वो जान-ए-मसीहा हमारा नबी
अर्श-ओ-कुर्सी की थीं आईना बन्दियां
सू-ए-हक़ जब सिधारा हमारा नबी
ख़ल्क़ से औलिया, औलिया से रुलुस
और रसूलों से आला हमारा नबी
हुस्न खाता है जिस के नमक की क़सम
वो मलीह-ए-दिल आरा हमारा नबी
ज़िक्र सब फीके जब तक न मज़कूर हो
नमकीन हुस्न वाला हमारा नबी
जिस की दो बूंद हैं कौसर-ओ-सलसबील
है वो रहमत का दरिया हमारा नबी
जैसे सब का ख़ुदा एक है वैसे ही
इन का, उन का, तुम्हारा, हमारा नबी
क़र्नों बदली रसूलों की होती रही
चांद बदली का निकला हमारा नबी
कौन देता है देने को मुंह चाहिए
देने वाला है सच्चा हमारा नबी
क्या ख़बर कितने तारे खिले छुप गए
पर न डूबे न डूबा हमारा नबी
मुल्क-ए-कौनैन में अम्बिया ताजदार
ताजदारों का आक़ा हमारा नबी
ला-मकां तक उजाला है जिस का वो है
हर मकां का उजाला हमारा नबी
सारे अच्छों में अच्छा समझिए जिसे
है उस अच्छे से अच्छा हमारा नबी
सारे ऊंचों में ऊंचा समझिए जिसे
है उस ऊंचे से ऊंचा हमारा नबी
अम्बिया से करूं अर्ज़ क्यों मालिकों!
क्या नबी है तुम्हारा, हमारा नबी
जिस ने टुकड़े किए हैं क़मर के वो है
नूर-ए-वह्दत का टुकड़ा हमारा नबी
सब चमक वाले उजलों में चमका किए
अन्धे शीशों में चमका हमारा नबी
जिस ने मुर्दा दिलों को दी उम्र-ए-अबद
है वो जान-ए-मसीहा हमारा नबी
ग़मज़दों को रज़ा मुज़्दा दीजे कि है
बेकसों का सहारा हमारा नबी
3. Sab Se Aula Wa Aala Hamara Nabi Lyrics in Urdu (उर्दू)
سب سے اولیٰ و اعلیٰ ہمارا نبی
سب سے اولیٰ و اعلیٰ ہمارا نبی
سب سے بالا و والا ہمارا نبی
اپنے مولیٰ کا پیارا ہمارا نبی
دونوں عالم کا دولہا ہمارا نبی
بزمِ آخر کا شمعِ فروزاں ہوا
نورِ اوّل کا جلوہ ہمارا نبی
جس کو شایاں ہے عرشِ خدا پر جلوس
ہے وہ سلطانِ والا ہمارا نبی
بجھ گئیں جس کے آگے سبھی مشعلیں
شمع وہ لے کر آیا ہمارا نبی
جس کے تلووں کا دھوون ہے آبِ حیات
ہے وہ جانِ مسیحا ہمارا نبی
عرش و کرسی کی تھیں آئینہ بندیاں
سوئے حق جب سدھارا ہمارا نبی
خلق سے اولیا، اولیا سے رسل
اور رسولوں سے اعلیٰ ہمارا نبی
حسن کھاتا ہے جس کے نمک کی قسم
وہ ملیحِ دل آرا ہمارا نبی
ذکر سب پھیکے جب تک نہ مذکور ہو
نمکین حسن والا ہمارا نبی
جس کی دو بوند ہیں کوثر و سلسبیل
ہے وہ رحمت کا دریا ہمارا نبی
جیسے سب کا خدا ایک ہے ویسے ہی
ان کا، ان کا، تمہارا، ہمارا نبی
قرنوں بدلی رسولوں کی ہوتی رہی
چاند بدلی کا نکلا ہمارا نبی
کون دیتا ہے دینے کو منہ چاہیے
دینے والا ہے سچا ہمارا نبی
کیا خبر کتنے تارے کھلے چھپ گئے
پر نہ ڈوبے نہ ڈوبا ہمارا نبی
ملکِ کونین میں انبیا تاجدار
تاجداروں کا آقا ہمارا نبی
لامکاں تک اجالا ہے جس کا وہ ہے
ہر مکاں کا اجالا ہمارا نبی
سارے اچھوں میں اچھا سمجھیے جسے
ہے اس اچھے سے اچھا ہمارا نبی
سارے اونچوں میں اونچا سمجھیے جسے
ہے اس اونچے سے اونچا ہمارا نبی
انبیا سے کروں عرض کیوں مالکو!
کیا نبی ہے تمہارا، ہمارا نبی
جس نے ٹکڑے کیے ہیں قمر کے وہ ہے
نورِ وحدت کا ٹکڑا ہمارا نبی
سب چمک والے اجلوں میں چمکا کیے
اندھے شیشوں میں چمکا ہمارا نبی
جس نے مردہ دلوں کو دی عمرِ ابد
ہے وہ جانِ مسیحا ہمارا نبی
غمزدوں کو رضا مژدہ دیجے کہ ہے
بیکسوں کا سہارا ہمارا نبی
आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान रज़ियल्लाहु अन्हु का यह कलाम “सब से औला व आला हमारा नबी” इश्क़-ए-रसूल ﷺ का एक ऐसा समंदर है जिसमें हर शेर हुज़ूर ﷺ की अज़मत और मर्तबे की गवाही देता है।
आपकी सहूलियत के लिए इस नात-ए-पाक के तमाम मुश्किल अल्फ़ाज़ के मायने (Word Meanings) और अशआर की आसान तशरीह (Explanation) नीचे दी गई है:
| मुश्किल अल्फ़ाज़ (Words) | मायने (Meanings) |
| औला | सबसे बेहतर, अफ़ज़ल (Superior) |
| आला | सबसे ऊँचा, बुलंद (Highest) |
| बाला / वाला | बुलंद मर्तबे वाला, बहुत ऊँचा (Exalted) |
| दोनों आलम | दोनों जहान (यह दुनिया और आख़िरत) |
| बज़्म-ए-आख़िर | आख़िरी महफ़िल (दुनिया की आख़िरी उम्मत/दौर) |
| शम्म-ए-फ़रोज़ां | चमकता हुआ चिराग या मोमबत्ती (Bright candle) |
| नूर-ए-अव्वल | सबसे पहला नूर (अल्लाह द्वारा सबसे पहले पैदा किया गया नूर) |
| शायां | लायक़, मुनासिब, योग्य (Deserving) |
| सुलतान-ए-वाला | ऊंचे मर्तबे वाला बादशाह |
| मश्अलें | मशालें, रोशनी के स्रोत (Torches) |
| आब-ए-हयात | वह पानी जिसे पीकर हमेशा की ज़िंदगी मिल जाए |
| जान-ए-मसीहा | मसीहा (हज़रत ईसा अलै.) को भी ज़िंदगी देने वाले |
| आईना बन्दियां | शीशों से सजावट करना, रौशनाई करना |
| सू-ए-हक़ | अल्लाह की तरफ़ (मेराज का सफ़र) |
| सिधारा | तशरीफ़ ले गए, प्रस्थान किया |
| ख़ल्क़ | मख़लूक़, सारी दुनिया या इंसान (Creation) |
| औलिया | वली की जमा, अल्लाह के नेक बंदे (Saints) |
| रसुल / रुसुल | रसूल की जमा, अल्लाह के पैग़म्बर (Prophets) |
| मलीह-ए-दिल आरा | सांवले सलोने हुस्न वाला जो दिल को पसंद आए |
| मज़कूर | ज़िक्र किया जाना, चर्चा होना |
| कौसर-ओ-सलसबील | जन्नत की दो मशहूर और मुक़द्दस नहरें/चश्मे |
| क़र्नों | सदियों, जुग-जुग से (Centuries) |
| बदली | बादल (Clouds) |
| मुल्क-ए-कौनैन | दोनों जहानों की सल्तनत |
| ताजदार | राजा, बादशाह, मुकुट धारण करने वाला |
| ला-मकां | वह जगह जो वक़्त और फ़ासले से आज़ाद हो (अर्श) |
| मकां | जगह, संसार, पृथ्वी |
| अम्बिया | नबी की जमा, तमाम पैग़म्बर |
| क़मर | चांद (Moon) |
| नूर-ए-वह्दत | एक अकेले अल्लाह का नूर |
| उम्र-ए-अबद | ऐसी ज़िंदगी जो कभी ख़त्म न हो (अमरता) |
| ग़मज़दों | दुखी लोग, परेशान हाल |
| मुज़्दा | ख़ुशख़बरी (Good news) |
| बेकसों | बेसहारा लोग, अनाथ, जिनका कोई न हो |
अशआर की आसान तशरीह (Explanation of Verses)
1. सब से औला व आला हमारा नबी / सब से बाला व वाला हमारा नबी अपने मौला का प्यारा हमारा नबी / दोनों आलम का दूल्हा हमारा नबी तशरीह: आला हज़रत फ़रमाते हैं कि हमारे नबी ﷺ पूरी कायनात में सबसे अफ़ज़ल, सबसे ऊंचे मर्तबे वाले और बुलंद हैं। वह अपने पालने वाले (अल्लाह) के सबसे महबूब हैं और इस दुनिया व आख़िरत (दोनों जहान) के दूल्हा यानी मरकज़ (Centre of attraction) हैं।
2. बज़्म-ए-आख़िर का शम्म-ए-फ़रोज़ां हुआ / नूर-ए-अव्वल का जल्वा हमारा नबी तशरीह: हुज़ूर ﷺ इस दुनिया की आख़िरी महफ़िल में सबसे आख़िर में तशरीफ़ लाए और चमकता हुआ चिराग बने, लेकिन हक़ीक़त यह है कि वह अल्लाह की मख़लूक़ात में सबसे पहला नूर हैं, जो आख़िर में आकर ज़ाहिर हुआ।
3. जिस को शायां है अर्श-ए-ख़ुदा पर जलूस / है वो सुल्तान-ए-वाला हमारा नबी तशरीह: हमारे नबी ﷺ ऐसे बुलंद मर्तबे वाले बादशाह हैं कि अल्लाह के अर्श पर जलवा अफ़रोज़ होना (बैठना/मेराज करना) सिर्फ़ उन्हीं की शान के लायक़ है, किसी और के नहीं।
4. बुझ गयीं जिस के आगे सभी मश्अलें / शम्म वो ले कर आया हमारा नबी तशरीह: हुज़ूर ﷺ के आने से पहले दुनिया में हिदायत के जितने भी चिराग या तरीक़े थे, वह सब आपके आने के बाद फीके पड़ गए या मंसूख़ (ख़त्म) हो गए। आप इस्लाम की ऐसी मुकम्मल शमा (रोशनी) लेकर आए जिसके आगे सब धुंधले हो गए।
5. जिस के तलवों का धोवन है आब-ए-हयात / है वो जान-ए-मसीहा हमारा नबी तशरीह: हज़रत ईसा (मसीहा) मुर्दों को ज़िंदा करते थे, लेकिन हमारे नबी ﷺ का मर्तबा यह है कि उनके मुबारक तलवों को छूकर निकलने वाला पानी (धोवन) ही ‘आब-ए-हयात’ (ज़िंदगी देने वाला पानी) बन जाता है। आप तो मसीहाओं को भी ज़िंदगी देने वाले हैं।
6. अर्श-ओ-कुर्सी की थीं आईना बन्दियां / सू-ए-हक़ जब सिधारा हमारा नबी तशरीह: जब शब-ए-मेराज को हमारे नबी ﷺ अल्लाह से मुलाक़ात के लिए आसमानों की तरफ़ तशरीफ़ ले गए, तो उनके इस्तक़बाल (Welcome) के लिए अर्श और कुर्सी को आईनों और रौशनियों से दुल्हन की तरह सजाया गया था।
7. ख़ल्क़ से औलिया, औलिया से रुलुस / और रसूलों से आला हमारा नबी तशरीह: मर्तबों की तरतीब बयान करते हुए शायर कहते हैं कि आम मख़लूक़ से ऊंचे अल्लाह के वली (औलिया) हैं, औलिया से ऊंचे अल्लाह के पैग़म्बर (रसूल) हैं, और तमाम रसूलों में सबसे आला और अफ़ज़ल हमारे नबी मुहम्मद ﷺ हैं।
8. हुस्न खाता है जिस के नमक की क़सम / वो मलीह-ए-दिल आरा हमारा नबी ज़िक्र सब फीके जब तक न मज़कूर हो / नमकीन हुस्न वाला हमारा नबी तशरीह: (इन दोनों अशआर में हुज़ूर ﷺ के जमाल/ख़ूबसूरती का ज़िक्र है) हुज़ूर ﷺ का हुस्न सांवला-सलोना (मलीह) और दिल को मोह लेने वाला था। कायनात का सारा हुस्न हुज़ूर ﷺ के हुस्न का ख़ैरात है (नमक की क़सम खाता है)। जब तक महफ़िल में हुज़ूर ﷺ के हुस्न व जमाल का ज़िक्र न हो, तब तक हर ज़िक्र फीका लगता है।
9. जिस की दो बूंद hain कौसर-ओ-सलसबील / है वो रहमत का दरिया हमारा नबी तशरीह: जन्नत की मशहूर और मुक़द्दस नहरें ‘कौसर’ और ‘सलसबील’ तो हमारे नबी ﷺ की रहमत के समंदर की महज़ दो बूंदों की तरह हैं। आप ﷺ तो पूरी कायनात के लिए रहमत का समंदर हैं।
10. जैसे सब का ख़ुदा एक है वैसे ही / इन का, उन का, तुम्हारा, हमारा नबी तशरीह: जिस तरह पूरी कायनात को पैदा करने वाला ख़ुदा एक ही है और वह सबका है, ठीक उसी तरह अल्लाह ने हुज़ूर ﷺ को भी सबका नबी बनाकर भेजा है—चाहे वह कोई भी हो, आप सबके नबी हैं।
11. क़र्नों बदली रसूलों की होती रही / चांद बदली का निकला हमारा नबी तशरीह: सदियों तक नबियों और रसूलों के आने का सिलसिला बादलों की तरह बदलता रहा (एक नबी के बाद दूसरे नबी आते रहे), और आख़िर में उन बादलों को चीरकर नबुव्वत का कामिल चांद (हमारे नबी ﷺ) तशरीफ़ लाया, जिसके बाद किसी और नबी की ज़रूरत नहीं रही।
12. कौन देता है देने को मुंह चाहिए / देने वाला है सच्चा हमारा नबी तशरीह: दुनिया में मांगने वाले तो बहुत हैं, लेकिन देने के लिए हुज़ूर ﷺ जैसा सख़ी और बड़ा दिल चाहिए। अल्लाह की अता से जो कुछ भी दुनिया को मिलता है, उसे बांटने वाले हमारे सच्चे नबी ﷺ ही हैं।
13. क्या ख़बर कितने तारे खिले छुप गए / पर न डूबे न डूबा हमारा नबी तशरीह: दुनिया के इतिहास में बड़े-बड़े रहनुमा और बादशाह तारों की तरह आए, चमके और वक़्त के साथ ख़त्म (छुप) गए। लेकिन हमारे नबी ﷺ का दीन और उनका नाम न कभी डूबा है और न कभी डूबेगा; वह हमेशा रौशन रहेगा।
14. मुल्क-e-कौनैन में अम्बिया ताजदार / ताजदारों का आक़ा हमारा नबी तशरीह: दोनों जहानों की सल्तनत में तमाम नबी (अम्बिया) अपने-अपने मर्तबे के लिहाज़ से बादशाह (ताजदार) हैं, लेकिन हमारे नबी ﷺ उन तमाम नबियों और बादशाहों के भी आक़ा और शहंशाह हैं।
15. ला-मकां तक उजाला है जिस का wo है / हर मकां का उजाला हमारा नबी तशरीह: हुज़ूर ﷺ के नूर का उजाला सिर्फ़ इस ज़मीन या मकान तक महदूद नहीं है, बल्कि जहां वक़्त और जगह ख़त्म हो जाती है (ला-मकां/अर्श), वहां तक हुज़ूर ﷺ का ही नूर चमक रहा है।
16. सारे अच्छों में अच्छा समझिए जिसे / है उस अच्छे से अच्छा हमारा नबी सारे ऊंचों में ऊंचा समझिए जिसे / है उस ऊंचे से ऊंचा हमारा नबी तशरीह: दुनिया में अच्छाई और बुलंदी की आख़िरी हद जो भी इंसान सोच सकता है, हमारे नबी ﷺ का मर्तबा उस सोची हुई अच्छाई से भी बेहतर और उस सोची हुई बुलंदी से भी कहीं ज़्यादा ऊंचा है।
17. अम्बिया से करूं अर्ज़ क्यों मालिकों! / क्या नबी है तुम्हारा, हमारा नबी तशरीह: शायर बड़े अदब और दीवानगी से तमाम नबियों से मुख़ातिब होकर (या उम्मत से कहकर) कहते हैं कि ऐ मालिकों! मैं दीगर नबियों से क्या अर्ज़ करूं? हमारे नबी का मर्तबा तो यह है कि वह आपके भी रहनुमा हैं और हमारे भी।
18. जिस ने टुकड़े किए हैं क़मर के वो है / नूर-ए-वह्दत का टुकड़ा हमारा नबी तशरीह: यह शेर हुज़ूर ﷺ के मोज़िज़े (Miracle) की तरफ़ इशारा करता है जब आपने उंगली के इशारे से चांद (क़मर) के दो टुकड़े कर दिए थे। वह नबी कोई आम इंसान नहीं, बल्कि अल्लाह के नूर-ए-वह्दत की ख़ास तजल्ली (टुकड़ा) हैं।
19. सब चमक वाले उजलों में चमका किए / अन्धे शीशों में चमका हमारा नबी तशरीह: दुनिया के आम रहनुमा या चिराग वहां रोशनी देते हैं जहां पहले से कुछ उजाला हो या जो देखने के क़ाबिल हों। लेकिन हमारे नबी ﷺ ने अरब के उस दौर में रोशनी फैलाई जो जहालत के अंधेरे में डूबा हुआ था (अंधे शीशों की तरह था), और उन्हें भी चमका दिया।
20. जिस ने मुर्दा दिलों को दी उम्र-ए-अबद / है वो जान-ए-मसीहा हमारा नबी तशरीह: हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम जिस्मानी तौर पर मरे हुए इंसान को ज़िंदा करते थे, लेकिन हमारे आक़ा ﷺ ने कुफ़्र और जहालत से मरे हुए इंसानों के ‘दिलों’ को ईमान की रोशनी देकर हमेशा-हमेशा की आध्यात्मिक (Spiritual) ज़िंदगी बख़्श दी।
21. ग़मज़दों को रज़ा मुज़्दा दीजे कि है / बेकसों का सहारा हमारा नबी तशरीह: (मक़्ता यानी आख़िरी शेर) आला हज़रत अपने आप को और दुनिया के तमाम दुखी और परेशान हाल लोगों (ग़मज़दों) को ख़ुशख़बरी (मुज़्दा) देते हुए कहते हैं कि घबराओ नहीं, क्योंकि जिनका दुनिया में कोई सहारा नहीं होता (बेकस), उनके मददगार और सहारा हमारे नबी ﷺ हैं।
ख़ातिमा (Conclusion):
यह कलाम हमें बार-बार हुज़ूर ﷺ की बारगाह में दरूद व सलाम भेजने और उनकी पैरवी करने की याद दिलाता है। उम्मीद है आपको यह ब्लॉग पोस्ट पसंद आई होगी। इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ ज़रूर शेयर करें।
शुक्रीया!



